तुम्हारी तरह

           
तुम पास तो नहीं,   शायद दूर हीं हो
आसमान के उस तारे की तरह,
जो रात के अंधेरे में, अपने होने का एहसास तो कराती है
लेकिन सुबह होते ही सूरज की रौशनी के पीछे छुप जाती है
शायद उसे भी धूप में जलने का डर हो, तुम्हारी तरह।।

कभी लगता है कि तुम सागर के उन लहरों की तरह हो
जो दूर से बाहें फैलाए, सागर  के किनारों से  मिलने आती हैं
अपने होने का एहसास कराती हैं और फिर लौट जाती हैं
शायद लहरों को भी किनारों को तड़पाने में मजा आता होगा तुम्हारी तरह।।









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