दिल भी तो सागर है,भावनाओं का

दिल भी तो सागर है,भावनाओं का
इसमें भी लहरे आती हैं
मन से टकराती हैं
और टूटकर तरह बिखर जाती हैं।
फिर से उठती हैं लहरो की तरह आशाएं
पूरे उल्लास के साथ आगे बढ़ती है
लगता है सारी खुशियों को समेट लिया है इसने,
लेकिन फिर किसी पत्थर से टकराकर
गम के दरिया में डूब जाती है।
कुछ पल शांत रहती है
शायद मौसम बदलने के कारण
लेकिन थोड़ी सी मुस्कुराहट के साथ
फिर से भावनाएं उमड़ने लगती है
एक नई उम्मीद के साथ
शायद सुनामी समाप्त हो गया है।।
अखिलेश


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