तेरा आना भी क्या आना है

तेरा आना भी क्या आना है
ये दिखावा है या छलावा है।।

न खुद से मिलना है ,न किसी और से मिलाना है
मुझे तो ये लगता  बस छलावा है।।

औरों के लिए हूर हो तुम,मेरे लिए मगरूर हो तुम,
सारे जग में मशहूर तेरा पहनावा है
तेरा आना तो बस एक छलावा है।।

वो भी क्या दिन थे जब तुमसे मिलने की मिन्नतें किया करता था,
दिन रात तुम्हे पाने की धुन में मगन रहा करता था।
आज तेरा इस तरह मिलना भी एक भुलावा है
तेरा आना तो बस एक छलावा है।।

तू मिल के न मिल पाई ऐसा लग रहा है
तुझे पाने की ललक मुझमें और बढ़ रहा है
तेरा सर झुका कर नजरें चुराना, कुछ बताता भी है
ये प्यार है  तेरा या कोई और इशारा भी है
तेरा आना भी क्या आना है,
ये दिखावा है या छलावा है।।
अखिलेश आदर्शी












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