तेरे आने के साथ जो बंधी थी उम्मीदें
तेरे आने के साथ जो बंधी थी उम्मीदें, बिखरती रही वो दिन गुजरने के साथ।। हर बार की तरह इस बार भी हमने, सजाए थे सपनों की एक अच्छी सी दुनियाँ। पाना था सब कुछ जिसमे, संग तुम्हारे, मेरी हर सफलता पे, नाम, तुम्हारा होना था मगर ये ख्याहिशों की डोली भी उठ न सकी, ख्वाब मिटते गए शाम ढलने के साथ।। ऐसा नहीं है कि तू विल्कुल बेवफा है दिए हैं तुमने भी कुछ अच्छे पल जिया है हमने भी तुम्हारे हसीन लम्हों को कुछ सफलताएं भी पाई हैं हमने संग तुम्हारे लेकिन सजाये सपने बचा न सका सुबह निकलने के साथ।। अब जब जाना है तुम्हे, अपने यादो की बारात छोड़कर, ...